कणगनहल्ली के समीप प्राचीन बौद्ध स्थल का संरक्षण: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण
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चर्चा में क्यों?
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने कणगनहल्ली स्थित प्राचीन महास्तूप के वैज्ञानिक संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए एक वृहद योजना को स्वीकृति दी है। यह स्थल सम्राट अशोक की एकमात्र सचित्र पाषाण प्रतिमा के लिए विख्यात है।
उत्खनन के प्रमुख पुरातात्विक साक्ष्य क्या हैं?
उत्खनन से ब्राह्मी लिपि और प्राकृत भाषा में उत्कीर्ण "अधोलोक महास्तूप" के अवशेष प्रकाश में आए हैं। सबसे महत्वपूर्ण खोज वह पाषाण पट्टिका है जिस पर "रायो असोको" (राजा अशोक) उत्कीर्ण है, जो विश्व में मौर्य सम्राट की उपलब्ध एकमात्र प्रामाणिक प्रतिमा है।
प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा हेतु महत्व
यह स्थल दक्कन में बौद्ध धर्म के विस्तार, मौर्यकालीन स्थापत्य कला और सातवाहन युगीन व्यापारिक मार्गों के अध्ययन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्य परीक्षा के कला एवं संस्कृति खंड में यह निरंतर प्रासंगिक है।
भारत के सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में, कणगनहल्ली स्थल के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यहाँ "रायो असोको" उत्कीर्ण सम्राट अशोक की पाषाण प्रतिमा पाई गई है। 2. यह मुख्य रूप से गुप्त काल के दौरान विकसित हुआ था। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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